मनुष्य कर्म करने में स्वतंत्र है और फल पाने में परतंत्र
किसी काम के करने में जीव को पूर्ण अधिकार है कि उसे करे,या न करे या फिर गलत करे।मैं लिखूं या न लिखूं या फिर अपशब्द लिखूं. इन तीनों बातों का मुझे पूर्ण अधिकार है।परन्तु जब लिख चुका तो समझो काम हो चुका। परिस्थिति मेरे हाथ से निकल गई, उसका परिणाम मुझे भो...
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Pt.डी.के.शर्मा"वत्स"
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[16 Feb 2009 10:09 AM]



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