इमरोज़.....एक मुलाक़ात
ये भी एक सपने के पूरा होने जैसा ही था....मैने कब पहली बार अमृता प्रीतम को पढ़ा था...याद भी नहीं...शायद आज से दस या पंद्रह साल पहले और उस वक्त ये सोचा था कि कभी इनसे मुलाक़ात होगी.....? अमृता तो नहीं पर इमरोज़ के रुप में ज़रुर अमृता को जीते हुए देखा.....
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tanu sharmaa...
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[16 Feb 2009 06:28 AM]



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