कृष्नायी राधा ज्यूँ
बन बन खोजे कृष्ण बियारी कित खोयी मोरी राधा प्यारी पुते हाथ, ले पिचकारी संग गुलाल काचौ,काचौ राग-रंग पछि-पछि देखे फूल पात सब कित छाई छोरी , दरस को रस पीत फूल बिच पीरी तितरी उस पर श्याम की पीली चुनरी ज्यों चंद्रदेव होड़ लगावे निज आभा संग चांदी छावे औ रा...
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swati
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[16 Feb 2009 03:30 AM]



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