मैं तो बेचैन ...
मैं तो बेचैन हकीकत को ज़ुबाँ देता हूँ । आप कहते हैं,बगावत को हवा देता हूँ । निज़ाम कैसा ये , खुशबू को नहीं आज़ादी ? सुर्ख फ़ूलों को , दहकने की दुआ देता हूँ । उसने मासूम परिन्दों के उजाड़े सपने , अपनी पलकों में कफ़स , जिनको सदा देता हूँ । मेरा ज़्मीर था , कल...
[पूरी पोस्ट]
sareetha
22
5
0
5
4
[16 Feb 2009 01:04 AM]



Shuffle








