तर-ए-शबनम सलाम किसका था

फुरसत के रातदिन वो खूबसूरत कलाम किसका था तर-ए-शबनम सलाम किसका था हवा में उंगलियों से लिख के जिसे मिटा भी दिया वो नाम किसका था दुआ निकली है जिसके अंदर से खत पड़ा था बेनाम किसका था माना सज़ा के मुस्तहिक़ ठहरे कत्ल का इल्ज़ाम किसका था शक्ल तो भीड़ की नहीं होती वो नकाब... [पूरी पोस्ट]
writer अभिषेक
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[15 Feb 2009 09:07 AM]

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