चुप ही

कबीरा खडा बाज़ार में ..... लक्ष्मी नारायण पयोधि की ’ आखेटकों के विरुद्ध ’ संग्रह की रचनाएँ आंतरिक बोध को खँगालती हैं और मानवीय जीवन में सक्रियता लाती हैं । ये कविताएँ आधुनिकता के रंग में रंग गये इंसान की संस्कारगत प्रकृति और प्रवृत्ति पर सीधा फ़ोकस डालती है । मानवीय सम्वेदनाओं... [पूरी पोस्ट]
writer sareetha
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[15 Feb 2009 05:31 AM]

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