लोकतंत्र में संस्कृति के ठेकेदारों का सर्टिफिकेट
कल फि़जा महकी-महकी सी थी। मौसम भीगा-भीगा सा था। बसंत के इस सुहावने मौसम मे प्यार के परिंदे चहकने लगे थे। वेलेंनटाइन पर प्रेमी युगलों पर ईश्किया बुखार चढ़ हुआ था। प्यार को लेकर सभी ने खूब कसमें खाई। प्यार करने वाले अपने प्रेमी के साथ अपने प्यार को परवा...
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समुत्कर्ष
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[14 Feb 2009 23:36 PM]



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