ज़िन्दगी यों गुज़रनी चाहिए
ज़िन्दगी यों गुज़रनी चाहिए. आदमीयत निखरनी चाहिए. जो परेशां करे किसी को भी, बात ऐसी न करनी चाहिए. लोग हमको न बेवफा कह दें , सोच कर रूह डरनी चाहिए. दर्द दिल में रहें दफ़न कितने, मुस्कराहट बिखरनी चाहिए. काश, कुछ काम वो करें जिससे, कोई किस्मत संवरनी चाहि...
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Hemant Snehi
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[14 Feb 2009 10:33 AM]



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