महुए की महक से गमक उठी है फ़िर गज़ल
वर्तमान कविता के दौर में लक्ष्मी नारायण पयोधि की कविताएं एक अलग ऊंचाई पर खडी नज़र आती हैं । पयोधि घनीभूत पीडा की अनुभूतियों के यथार्थवादी कवि हैं । वे समय की चालाकियों , धोखों ,फ़रेबों से पूरी तरह सावधान और चौकन्ने हैं । बाल साहित्य के साथ ही विभिन्न व...
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sareetha
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[14 Feb 2009 07:38 AM]



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