अभियोग वा सन्देह
मैंने नमस्ते कर उत्तर दिया कि आप के चरणों की कृपा है । क्योंकि इस मुकद्में के पहले मैंने किसी अदालत में समय न व्यतीत किया था, सरकारी तथा सफाई के वकीलों की जिरह को सुन कर मैंने भी साहस किया था । अब आगे.. इस के बाद सब से पहले मुख्य नेता महाशय के...
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डा. अमर कुमार
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[14 Feb 2009 07:06 AM]



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