यूं हो रहा है 'भारत निर्माण'

कुछ बातें... उसके पैरों में जूते नहीं थे जूते क्‍या कोई फटी चप्‍पल भी नहीं तन पर थे कुछ फटे पुराने कपड़े आंखों में उम्‍मीद की किरण लिए वो हर राहगीर को निहार रहा था एक आस था दामन थामे हाथ आगे बढ़ाता फैलाकर अपनी हथेली को सोचता शायद इस पर कोई भार रख दे, हर गुजरने वा... [पूरी पोस्ट]
writer भारत मल्‍होत्रा
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[14 Feb 2009 01:43 AM]

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