डांस मी टू द एन्ड ऑफ लव

प्रत्यक्षा कोई ताला था जिसकी चाभी बस मेरे पास थी । नीम अँधेरी रातों में अपने भीतर की गर्माहट में उतर कर देखा था मैंने ..ठंड से सिहरते किसी ऐसी अनजान लड़की को बाँहों में भरकर ताप दिया था और फिर पाया था , अरे इसकी शकल तो हू बहू मेरी है । उसके चेहरे को हथेलियों में... [पूरी पोस्ट]
writer Pratyaksha
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[13 Feb 2009 11:40 AM]

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