TIRANDAJ
न इबादतों का जिक्र है न परस्तिशों का सवाल हैसिवा एक लफजे गुनाह के मेरी जिंदगी की किताब मेंमेरा परिचय इसी के साथदेवेश त्यागीविशेष- साधुवाद, धन्यवाद, और लिखो जानी तुम्हारी लेखनी और सोच में कितना दम है, तुमसे बेहतर कौन जानता है। तरकस से शब्दभेदी बाण...
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devesh tyagi
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[13 Feb 2009 08:58 AM]



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