कहाँ भूला....कुछ तो नही..
हमारे सपने तलाश लाते हैं वही पुराने दोस्त वही पुराने घर.. वही बाग़ बगीचे वही पुराने इमली के पेढ़ वही पुराने हमसफ़र वही... मास्टर साब के हाथों पिटने की सज़ा वही बसों के पीछे झूलकर स्कूल जाना, रस्ते में लोगों को मुंह चिढाना वही साइकिल से गिर कर घुटने का...
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सबकी कहानी
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[13 Feb 2009 07:42 AM]



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