चिंता

Ashutosh हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, बैठ शिला की शीतल छाँह, एक पुरुष, भीगे नयनों से देख रहा था प्रलय प्रवाह। नीचे जल था ऊपर हिम था, एक तरल था एक सघन, एक तत्त्व की ही प्रधानता-कहो उसे जड़ या चेतन। दूर-दूर तक विस्तृत था हिम स्तब्ध उसी के हृदय-समान, नीरवता-सी शि... [पूरी पोस्ट]
writer आशुतोष कुमार राय
views
21
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
1
[13 Feb 2009 05:48 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix