चिराग अपनी उम्मीदों के....

संजीवनी बहुत अँधेरा है पर दिल को मत उदास रखो । चिराग अपनी उम्मीदों के आस पास रखो ॥ मेरी तस्वीर तुम्हे जाम में दिख जाएगी - अपने होठों पे मेरे नाम की एक प्यास रखो ॥ हार ख़ुद जीत का बन हार गले आ के पड़े - बुलंद इतना दिल में जीत का एहसास रखो॥ - विनय ओझा 'स्नेहिल'... [पूरी पोस्ट]
writer विनय ओझा 'स्नेहिल'
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[13 Feb 2009 04:26 AM]

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