कौन किसे गाली देरहा है, यह जनता तय करे तो बेहतर !
ये पाँच लाइन भी लिखने की क्या ज़रुरत भी ? कोई एक पुराना श्लोक ढूंढकर चेप देते। चूंकि वह एक महान ग्रन्थ में से निकला होता, इसलिए उसमें कोई तर्क होता न होता पर उसकी तार्किकता सवयंसिद्ध होती। वैसे तो गालियों की भाषा आपने ही शुरु की है पर आपकी गाली का भी...
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Sushant Singhal
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[13 Feb 2009 03:17 AM]



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