GAZAL

राही मासूम रज़ा का साहित्य भिखमंगा हो, धोबी हो, वह भंगी हो कि नाई साधू हो कि जोगी हो, वह बाबा हो कि माई वह गाँव का मुखिया हो, कि बीवी का हो भाई जो आया सिपाही के लिए यह खबर आई या राह में, या गाँव में उसने यह सुना है हर गाँव,हर एक शहर बगावत पे तुला है... [पूरी पोस्ट]
writer डा. फीरोज़ अहमद
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[12 Feb 2009 22:31 PM]

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