जनता तो रस्ते का बूँटा

जोशी कविराय  - Joshi Kavirai राम नाम की लूट, फील गुड । लूट सके तो लूट, फील गुड ॥ हमें रिटायर करें साठ पर नेतागिरी अटूट, फीलगुड । मुसलमान, अँगरेज़ थक गए अपने डालें फूट, फील गुड । क्या पढ़ना ऎसी चिट्ठी को फटी हुई है कूंट, फील गुड । जनता तो रस्ते का बूँटा जितना चाहे चूँट, फील गुड ।... [पूरी पोस्ट]
writer joshi kavirai
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[12 Feb 2009 13:40 PM]

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