राग बिहाग-वीणा सहस्त्र बुधे
मजलिस-ए-शाम उठे देर हुई साज़ मुँह ढाँपके सब सो भी चुके शामियाने में लटकते हैं अभी रात के जाले दामन-ए-शब पे लटकता है अभी चाँद का पैवंद गुलज़ार राग बिहाग का संक्षिप्त परिचय- थाट- बिलावल जाति-औड़व सम्पूर्ण ( आरोह मे में 5 स्वर,अवरोह मे-7 स्वर ) वादी स्वर-ग...
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Parul
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[12 Feb 2009 10:29 AM]



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