फिर नयन उन्माद छाया
प्रेम की ऋतु फिर से आई फिर नयन उन्माद छाया फिर जगी है प्यास कोई फिर से कोई याद आयाफिर खिलीं कलियाँ चमन में रूप रस मदमा रहीं---- प्रेम की मदिरा की गागर विश्व में ढलका रही फिर पवन का दूत लेकर प्रेम का पैगाम आया----- टूटी है फिर से समाधि आज इक महादेव की...
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शोभा
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[11 Feb 2009 22:59 PM]



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