गांव का घर मानव मंदिर, पत्थर का माकान नहीं है.
गांव लोगों के रहने का, केवल एक स्थान नहीं है. गांव का घर मानव मंदिर, पत्थर का माकान नहीं है. सभ्यता के चरम पै जाकर, भाव सरल मन में जब आएं. प्रकृति की गोद में खेलें, पछी संग बैठे बतियायें. खुली हवा में करें ठिठोली, अंदर तक चित्त खुश हो जाए. गांव छोड क...
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योगेश समदर्शी
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[11 Feb 2009 22:13 PM]



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