GAZAL

राही मासूम रज़ा का साहित्य फ़ौजों की हर सफ़ में इसी बात का चरचा जिस आँख में देखो, वहीं भड़का है यह शोला खुद उनके मसाइल (समस्याएँ) की हवा का भी है झोंका एहसासे बग़ावत इन्हें देता है दिलासा हम लड़ने पै आयेंगे तो फिर डट के लड़ेंगे तोपों से भी अड़ जायेंगे, पीछे न हटेंगे... [पूरी पोस्ट]
writer डा. फीरोज़ अहमद
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[11 Feb 2009 22:09 PM]

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