मौसम किसी का उधार नहीं रखते

उनींदरा ये बारिश कहीं और की थी...बर्फ़ भी शायद यहां की नही थी....किसी और जगह बरसना और बिखरना था इन्‍हें...। तो यहां क्‍यों आए....हां शायद कोई उधार बाक़ी रह गया था किसी का...ज़रूरी नहीं है कि भीगकर और छूकर ही कहा जाए कि मौसम किसी का उधार नहीं रखते...यूं भी सम... [पूरी पोस्ट]
writer शायदा

मौसम

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[11 Feb 2009 18:01 PM]

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