मचलता पारा हुआ है आदमी
वक्त का मारा हुआ है आदमी । तंत्र से हारा हुआ है आदमी । बस चुनावों के समय उनके लिए काम का नारा हुआ है आदमी । वोट दें, ना दें, चुने जायेंगे वो क्यूँ यूँ बेचारा हुआ है आदमी । कब से घर सर पर उठाये फिर रहा एक बंजारा हुआ है आदमी । क़ैद मुट्ठी में नहीं कर पा...
[पूरी पोस्ट]
joshi kavirai
23
3
0
3
3
[11 Feb 2009 09:45 AM]



Shuffle








