हीरे मोती जडे़ गहनों जैसे फ़िल्मी गीतों के बोल- NO EXPIRY DATE !! पं. नरेंद्र शर्मा-

दिलीप के दिल से अभी अभी कहीं ये बहस चल रही थी कि फ़िल्मी गीतों में गीतकार का क्या योगदान होता है. बेशक , हम जो भी गाने आज सुनते है, उनमें से अधिकांश में बोल तो सिर्फ़ सुरों को बांधने के लिये ही है. और तो और, जैसा कि स्वयं लताजी नें अभी अभी किसी इंटरव्यु में क्या सच कह... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप कवठेकर
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[11 Feb 2009 03:48 AM]

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