सड़क और पगडण्डी के बीच
पगडण्डी जैसी सड़क पर राहुल नितांत अकेला चल रहा था दस मिनट के दौरान एक भी साया उसके पास से नहीं गुजरा, खामोशी ऐसी कि कानों में सीटियों बज रही थी, धूप ढलने को थी फ़िर भी काट रही थी, ये रास्ता शहर से शोर्य कॉलोनी तक जाता था हालाँकि यहाँ सब कुछ सामान्य था...
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Kishore Choudhary
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[10 Feb 2009 23:36 PM]



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