एक सपना नींद ने बाँहों में भर लिया

अमृता प्रीतम की याद में..... वनमहोत्सव यानी पेडों का जश्न .... अमृता ने मास्को में उस वक्त देखा ,जब वह मास्को हवाई अड्डे से शहर की और आ रही थी तब ...यहाँ चालीस किलोमीटर लम्बी राह पर जैसे कोई मेला लगा हुआ था ...लोग हाथो में कुदाली और बेलचे पकड़े मोटरों में से उतर रहे थे ....जवान... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]
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[10 Feb 2009 23:09 PM]

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