मैं न जाने कहां आ गया हूं प्रदेश के गांव मे.
मैं न जाने कहां आ गया हूं प्रदेश के गांव मे. कच्चा एक माकान, मिट्टी का सामान, रेतीला सा आगन, एक भोला सा मन, लकडी वाला हल, सरसों वाली खल, लोटा भर के छाय, काली वाली गाय, यदि कहीं दिख जाय, तब बोलूंगा आज आ गया अपने देश के गांव में., मैं न जाने कहां आ गया...
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योगेश समदर्शी
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[10 Feb 2009 08:59 AM]



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