GAZAL

राही मासूम रज़ा का साहित्य जब बात वतन की है तो क्या भाई भतीजा अंग्रेजों के जो साथ हैं उनसे नहीं रिश्ता मजहब को भी है बात नहीं कोई तमाशा अंग्रेजों की फौजों से निकल आये तो अच्छा रोके से न मानेगी जो एक बार चलेगी हम रन की तरफ जाते हैं तलवार चलेगी... [पूरी पोस्ट]
writer डा. फीरोज़ अहमद
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[09 Feb 2009 22:44 PM]

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