और क्या अहदे-वफ़ा होते हैं
यह गीत जब भी सुनता हूँ इसका असर रूह तक होता है। ग़ुम हो जाता हूँ बीते हुए पलों में और इसका लुत्फ़ धीरे-धीरे मुझे जज़्ब कर लेता है। जैसे आनन्द साहब ने इस गीत के शब्दों को दर्द का सानी बना दिया है। सुनिए और अपनी यादों में सराबोर हो जाइए। Aur Kya Ahd-e-Wa...
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विनय
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[09 Feb 2009 17:54 PM]



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