रंग और तुम....

mahua तुम्हें नही मालूम लेकिन मैं रंग भरना चाहती हूं तुम्हारे अंदर......वो सारे रंग जो तुमने जबरदस्ती अपने अंदर से निकाल कर फेंक दिए कि कही गलती से मुझसे दोबारा मुलाकात ना हो जाए....वो सारे रंग जो मुझे नज़र आते हैं.......मुझे मालूम है तुम्हें भी दिखते हैं.... [पूरी पोस्ट]
writer tanu sharmaa...
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[09 Feb 2009 05:37 AM]

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