सांस्कृतिक राष्ट्रवाद : भारतीयता की अभिव्यक्ति
लेखक- पं0 दीनदयाल उपाध्याय भारत में एक ही संस्कृति रह सकती है; एक से अधिक संस्कृतियों का नारा देश के टुकड़े-टुकड़े कर हमारे जीवन का विनाश कर देगा। संस्कृति ही भारत की आत्मा होने के कारण वे भारतीयता की रक्षा एवं विकास कर सकते हैं। शेष सब तो पश्चिम का अ...
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sumansourabh
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[08 Feb 2009 22:37 PM]



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