समय जहाँ उल्टा लटका है
इस जगह के भीतर घुसते ही लगा जैसे निपट अनजान जगह आ गया हूँ। विश्व की सीमाओं से परे। क्या हुआ होगा?अघोरी या सिद्ध की तीव्र और आक्रामक भक्ति से ईश्वर की आत्मा में भारी कम्पन हुआ होगा और ये जगह देश और काल की तमाम सीमाओं को भेद कर एक नए ही आयाम में विन्यस...
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sanjay vyas
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[08 Feb 2009 21:59 PM]



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