कुछ पंक्तियाँ, नवभारत टाईम्स के सहयोगियों के नाम...
कुछ पंक्तियाँ, नवभारत टाईम्स के सहयोगियों के नाम... सुबह गुज़रती और शाम कट जाती है, मगर हमेशा याद आपकी आती है। अख़बारों के साथ सुबह दस्तक कोई, हर दिन मेरा दरवाज़ा खटकाती है। ख़बरों के ही बीच झरोखे से अक्सर, कोई शक्ल उभर कर कुछ मुस्काती है। किसी पृष्ठ...
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Hemant Snehi
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[08 Feb 2009 08:02 AM]



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