गाँव की हशीन वादियों में बस जीता जा रहा हूँ ....
कहाँ क्या हो रहा घाट रहा क्या राज में कौन कैसे जी रहा क्या होने वाला समाज में नहीं पता मुझे कुछ भी सब भूलता जा रहा हूँ गाँव की हशीन वादियों में बस जीता जा रहा हूँ सुनता हूँ कुछ घटनाएं , अचरज सा कुछ होता है जगाता हुआ हृदय फ़िर भी मौन होके सोता है चिल्ल...
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anilpandey
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[08 Feb 2009 07:59 AM]



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