कहता हूँ कुछ कहनें ही दो ...........
रोता हूँ रोने ही दो खोता हूँ खोने ही दो ना दे सको ऐ दुनिया वालो कहता हूँ कुछ कहने ही दो रोटी की कमी रहती है मुझे पानी की किल्लत यहाँ नहीं है मुशीबतें इफराद मेरी दुनिया में चाहिए मुझे क्या और भला इस दुनिया में ही रहनें दो आंखों में आंसू आशाओं के चाहती...
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anilpandey
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[08 Feb 2009 07:51 AM]



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