अमल
कभी कैसे तो सबकुछ बहुत खूबसूरत हो जाता है। जैसे कोहरे के बीच से सवेरा बादलों को धकेलता हुआ निकलता है। हल्की बूंदाबांदी के बीच से किरण निकल रंगों सी बिखर जाती है। उदर में उठी पहली हलचल, किसी अनजान घबराये बच्चे का पूरे विश्वास से उँगली थाम लेना , बाबूज...
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Beji
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[08 Feb 2009 02:07 AM]



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