चावल बिनना

मनीष उवाच! आज चावल धोते हुए मेरे चावल बीनने का इतिहास याद आ गया - पहले मम्मी से बोलते थे, लाइए हम बीन देते हैं। उसके बाद शुरू होता था प्रोजेक्ट। ये क्या है, ये कैसा काला काला सा चावल है। फिर काफी देर बाद मम्मी बोलती थी, तुम रहने दो, मेरा पूरा खाना बन गया और तुम... [पूरी पोस्ट]
writer Manish
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[07 Feb 2009 15:45 PM]

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