हमरी अटरिया पे आजा रे संवरिया देखा देखी तनिक होई जाय......
भाई हमें तो सुजात हुसैन खां साहब का ये अंदाज़ बहुत पसन्द है, सितार पर जिस अंदाज़ से उनकी उंगलियाँ चलती है उससे अलग उनकी डूबी हुई आवाज़ भी कम नहीं है।आज आप सुनिये पर पता नहीं क्यौ एक बात जो दिल में है आज कह लेना चाहता हूँ, इतना नाम पं जसराज और पं भीमसेन...
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vimal verma
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[07 Feb 2009 12:22 PM]



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