क्षितिज
पोस्ट नंबर 7 क्षितिज मैं जानता हूं आज भी जब तुम हार जाते हो, थक जाते हो, खीज जाते हो, अपने से, तब मेरी ओर आते हो, सारी दुनिया को छोड़ कर, किसी समंदर के तट से, मेरी ओर निहारते हो, एक अबोध बालक की तरह, और तब मैं तुम्हें प्रदान करता हूं, अपार मानसिक ऊ...
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MAVARK
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[07 Feb 2009 04:57 AM]



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