आ अब लौट चलें

आत्मदर्पण आ अब लौट चलें आंध्रप्रदेश के शरनापल्ली के 12 साल के राजू पद्मशाला को इसके अलावा कोई रास्ता नहीं सुझा. आखिर कोई कब तक हर रोज मार खाता रहे. मां ने किसी और के साथ घर बसा लिया था और पिता के लिए दारु पीना दुनिया का सबसे बड़ा सुख था. पिता दारु पी कर आते और... [पूरी पोस्ट]
writer प्रशांत दुबे
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[07 Feb 2009 01:57 AM]

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