कौन हो तुम…
कौन हो तुम… बता दो…… मैं जानना चाहती हूँआकर्षण की डोरी क्यों फेंक रहे हो? मैं इसमें बँधती जा रही हूँ बहुत कुलबुला रही हूँ सम्मोहन का जाल क्यों बुन रहे हो? ये मुझे कसता जा रहा है मैं इसमें कसमसा रही हूँप्रेम की मदिरा क्यों बहा रहे हो ये मुझे मदहोश कर...
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शोभा
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[06 Feb 2009 21:59 PM]



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