ओ लाल मेरी पत रखियो ...

प्रत्यक्षा दिन गुज़रता है , दीवार पर हिलते काँपते सिमटती छाया , साया गुज़र जाता है आसपास , रात बीतती नहीं , आँखों में सपना बीत जाता है । आग के फूल रेगिस्तान में उगते हैं , पैर के तलवे फटते हैं , सफर होता नहीं खत्म , दिन बीतता है , बीतती है साँस और छाती पर हर रोज़... [पूरी पोस्ट]
writer Pratyaksha
views
50
upvote
6
downvote
0
rating
6
comments
11
[06 Feb 2009 12:38 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix