सफ़र के कुछ सफ़े - 1
ब्लॉग जगत के सभी मित्रों को नमस्कार.... ! 6 अक्टूबर 2009 को अपने देश की ज़मीन पर पैर रखते ही सोचा था कि हर दिन का अनुभव आभासी डायरी में उतारती जाऊँगी लेकिन वक्त हथेली से रेत की तरह फिसलता रहा....आज पूरे चार महीने हो गए घर छोड़े हुए... घर कहते ही मन सोच...
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मीनाक्षी
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[06 Feb 2009 11:29 AM]



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