दुख
किसी गर्भाशय में नौ महीने
रह कर नहीं जन्मता है वो
न है बैठता है गिद्ध की तरह
किसी सूखे वृक्ष पर मुर्दे के इंतज़ार में
दुख में इंतज़ार
इंतज़ार में दुख
बहुत फर्क है लेकिन
वह वहाँ भी नहीं होता
सांस छोड देने के बाद
सांस लेने के लिये उतावले
फेफडों के अंकुचन...
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Avanish Gautam
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[06 Feb 2009 03:09 AM]



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