मुझे रास्ते ही अज़ीज़ हैं मुझे मंज़िलों की खबर नहीं
मुझे रास्ते ही अज़ीज़ हैं मुझे मंज़िलों की खबर नहीं मेरा कारवां मेरा दोस्त है मुझे बस्तियों की फिकर नहीं कभी मैने तुझसे गिला किया कभी तूने मुझको भुला दिया हम यार हैं के रक़ीब हैं या तेरी दुआ में असर नहीं लो ये मौज और ये कश्तीयाँ मुझे मेरे हाल पे छोड़...
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Shafaq
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[06 Feb 2009 02:06 AM]



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