GAZAL
गर जख्म लगाना है तो फिर जख्म हो कारी कल उनकी थी बारी तो है आज हमारी सुनते हैं कि जाने को है साहब की सवारी है शोर कि अंग्रेज पे है साल यह भारी आफत में यह काटेंगे मुसीबत से कटेगा इनका यह सीवाँ साल कयामत से कटेगा...
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डा. फीरोज़ अहमद
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[05 Feb 2009 22:45 PM]



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