“सुर्पनखा बन नाक कटाये”,, क्या इसे कहावत बना सकते हैं?
ये तो सभी जानते हैं कि त्रेता युग में विभिषण ने रावण को हरवाने में भगवान राम की मदद की थी जिसके फलस्वरूप इस तरह के केस के लिये ही ये कहावत बनी है - घर का भेदी लंका ढाये।
उसी त्रेता युग में सुर्पनखा भी हुई थी, जो पहले राम पर लट्टू हुई लेकिन राम [...]...
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Tarun
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[05 Feb 2009 22:00 PM]



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