आप हम और ये नदी

फुरसत के रातदिन आज अपने इश्क़ की मौसम ने दे दी यूँ खबर फूल से होने लगे हैं.... आप हम और ये नदी हम ने अभी सोचा न था की आ गयी मंज़िल क़रीब कुछ रास्ता खोने लगे हैं…. आप हम और ये नदी लग गया इल्ज़ाम जब, नीयत पर हमारी - आपकी क्या बारीशों में धो रहे हैं.... आप हम और ये नदी... [पूरी पोस्ट]
writer Shafaq
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[28 Jan 2009 07:52 AM]

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